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जयपुर

राजस्थान BJP में बगावत के बीच हाईकमान सख्त! बीएल संतोष का बड़ा संदेश

राजस्थान निकाय चुनाव से पहले BJP में बागियों को साधने की कवायद तेज, बीएल संतोष ने जयपुर में संगठन को दिया एकजुटता का संदेश।

राजस्थान BJP में बगावत के बीच हाईकमान सख्त! बीएल संतोष का बड़ा संदेश

जयपुर | 5 सितंबर 2026 राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। टिकट वितरण के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर कई जगह सामने आए असंतोष और बागी उम्मीदवारों की चुनौती के बीच केंद्रीय संगठन सक्रिय हो गया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने जयपुर पहुंचकर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की और पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को अधिकृत प्रत्याशियों के समर्थन में एकजुट रहने का स्पष्ट संदेश दिया।

टिकट बंटवारे के बाद क्यों बढ़ी BJP की चिंता?

निकाय चुनाव के टिकट घोषित होने के बाद कई जगह टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों और उनके समर्थकों में असंतोष सामने आया। कुछ दावेदार बागी होकर चुनाव मैदान में भी उतर गए।

ऐसे उम्मीदवार भाजपा के लिए इसलिए चुनौती बन सकते हैं क्योंकि वे पार्टी के परंपरागत वोटों में सेंध लगाकर अधिकृत उम्मीदवार का चुनावी गणित प्रभावित कर सकते हैं।

इसी स्थिति के बीच केंद्रीय नेतृत्व ने राजस्थान में संगठनात्मक एकजुटता पर जोर बढ़ा दिया है।

बीएल संतोष ने जयपुर में संभाला मोर्चा

बीएल संतोष ने जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पार्टी की चुनावी तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक की।

बैठक में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल सहित चुनाव प्रबंधन और संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

बैठक में टिकट वितरण के बाद पैदा हुए असंतोष, अधिकृत उम्मीदवारों के समर्थन, चुनाव प्रचार, संगठन की एकजुटता और बूथ स्तर की तैयारियों जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

जिसे पार्टी ने टिकट दिया, वह सबका उम्मीदवार

बैठक में बीएल संतोष ने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशी के साथ संगठन को पूरी मजबूती से खड़ा रहना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संदेश यह था कि प्रत्याशी व्यक्तिगत रूप से किसी की पसंद या नापसंद हो सकता है, लेकिन पार्टी द्वारा टिकट दिए जाने के बाद वह संगठन का उम्मीदवार है।

यह संदेश उन क्षेत्रों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां टिकट वितरण के बाद असंतोष सामने आया है।

विधायकों को भी संगठन का स्पष्ट संदेश

बैठक के दौरान संगठनात्मक अनुशासन पर भी जोर दिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक बीएल संतोष ने कहा कि जो विधायक खुद को संगठन से बड़ा समझते हैं, उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए और ऐसा व्यवहार अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

निकाय चुनाव के बीच आए इस संदेश को संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों पर नजर

भाजपा के लिए अब महत्वपूर्ण काम उन नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साधना है जो टिकट नहीं मिलने के बाद चुनाव मैदान में उतर गए हैं या पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार से नाराज हैं।

पार्टी ऐसे क्षेत्रों पर खास ध्यान दे रही है जहां बागी प्रत्याशी भाजपा के वोटों को प्रभावित कर सकते हैं।

निकाय चुनाव में कई सीटों पर मामूली वोटों का अंतर भी हार-जीत तय कर सकता है। ऐसे में पार्टी अपने वोटों के बंटवारे को रोकने की रणनीति पर काम कर रही है।

सांसदों की सक्रियता का मुद्दा भी उठा

बैठक में सांसदों की चुनाव प्रचार में सक्रियता को लेकर भी चर्चा हुई।

शेखावाटी क्षेत्र से जुड़े एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने सांसदों की पर्याप्त सक्रियता नहीं होने का मुद्दा उठाया। इसके बाद चुनाव प्रचार में सांसदों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया गया।

पार्टी चाहती है कि सांसद, विधायक और संगठन के पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में प्रत्याशियों के पक्ष में पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार करें।

बड़े नेताओं के लिए भी चुनाव बना प्रतिष्ठा की लड़ाई

राजस्थान के इन निकाय चुनावों पर इसलिए भी नजर है क्योंकि कई बड़े भाजपा नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में मुकाबला हो रहा है।

कोटा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की राजनीतिक पकड़ पर नजर रहेगी।

जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सक्रिय हैं। जोधपुर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत का भी गृह क्षेत्र है, इसलिए यहां का मुकाबला राजनीतिक रूप से खास माना जा रहा है।

बीकानेर में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और भरतपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चुनाव परिणामों पर नजर रहेगी।

जयपुर में कई सीटों पर रोचक मुकाबला

जयपुर नगर निगम चुनाव में भी मुकाबला दिलचस्प है। कुछ वार्डों में उम्मीदवारों की संख्या काफी अधिक है, जबकि कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई की स्थिति बनी हुई है।

इस कारण राजधानी जयपुर का चुनाव प्रदेश की राजनीति में खास महत्व रखता है।

BJP के सामने अब तीन बड़ी चुनौतियां

निकाय चुनाव में भाजपा के सामने फिलहाल तीन महत्वपूर्ण चुनौतियां दिखाई दे रही हैं—

पहली: टिकट नहीं मिलने से नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाना।

दूसरी: बागी उम्मीदवारों के कारण पार्टी के वोटों का बंटवारा रोकना।

तीसरी: सांसदों, विधायकों और संगठन को एक साथ मैदान में उतारकर अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में मजबूत चुनाव प्रचार करना।

बीएल संतोष की जयपुर बैठक को इन्हीं चुनौतियों के बीच पार्टी के डैमेज कंट्रोल और चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

कांग्रेस की नजर भी BJP के अंदरूनी घटनाक्रम पर

राजस्थान का निकाय चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। भाजपा जहां अपने संगठन को एकजुट रखने और बागियों से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस भी स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

कई जगह मुकाबला सीधे भाजपा-कांग्रेस के बीच है, जबकि बागी और निर्दलीय उम्मीदवार कुछ सीटों पर चुनाव को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना सकते हैं।

अब जनता के फैसले का इंतजार

राजस्थान के निकाय चुनाव सिर्फ स्थानीय सरकार बनाने तक सीमित नहीं हैं। इनके परिणाम से प्रदेश में दोनों प्रमुख दलों की जमीनी ताकत का भी संकेत मिलेगा।

अब देखना होगा कि भाजपा अपने नाराज नेताओं और बागी उम्मीदवारों को कितना साध पाती है और बीएल संतोष की संगठनात्मक रणनीति चुनावी मैदान में कितना असर दिखाती है।

सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या भाजपा एकजुट होकर निकाय चुनाव में अपना दबदबा कायम रख पाएगी, या बागी उम्मीदवार पार्टी का चुनावी गणित बिगाड़ देंगे?

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