राजस्थान में कल मेयर-सभापति चुनाव: कई शहरों में फंसा सत्ता का गणित, निर्दलीय पार्षदों पर टिकी नजर
निकाय चुनाव के बाद अब शहरों की सरकार बनाने की बारी; 21 सितंबर को महापौर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए मतदान, कई निकायों में बहुमत का गणित दिलचस्प
जयपुर, 20 सितंबर 2026। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बाद अब महापौर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। रविवार को भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय खेमों में बैठकों का दौर जारी रहा। सोमवार, 21 सितंबर को विभिन्न नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद के लिए मतदान होना है।
निकाय चुनाव के परिणामों के बाद
शहरों में किसी एक दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इसी वजह से चुनाव से ठीक पहले पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिशें भी तेज हैं।
होटल और रिसॉर्ट तक पहुंची सियासी हलचल
महापौर और सभापति चुनाव से पहले कई जगह भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों को होटल और रिसॉर्ट में रखने की खबरें सामने आई हैं।
राजनीतिक दल अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने में लगे हैं। जिन निकायों में भाजपा या कांग्रेस स्पष्ट बहुमत से दूर हैं, वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण हो सकता है।
21 सितंबर को होगा मतदान
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार महापौर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए 21 सितंबर को मतदान और मतगणना होगी।
नगर निगम में निर्वाचित पार्षद महापौर, नगर परिषद में सभापति और नगरपालिका में अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। इसके बाद 22 सितंबर को उप महापौर, उप सभापति/उपाध्यक्ष जैसे पदों के चुनाव की प्रक्रिया होनी है।
कई निकायों में निर्दलीय बने अहम
राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों में भाजपा और कांग्रेस के अलावा बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी पार्षद बने हैं। कई ऐसे निकाय हैं जहां किसी एक प्रमुख दल को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।
ऐसी जगहों पर निर्दलीय पार्षद किस उम्मीदवार का समर्थन करते हैं, इससे अध्यक्ष पद के चुनाव का समीकरण प्रभावित हो सकता है।
सांगरिया में निर्दलीयों की बड़ी संख्या
हनुमानगढ़ जिले के संगरिया नगर निकाय का समीकरण खास तौर पर चर्चा में है। यहां 35 सीटों में निर्दलीयों ने 25 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के पास 8 और भाजपा के पास 2 पार्षद हैं।
चुनाव से पहले यहां राजनीतिक तनाव भी सामने आया है। कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया ने भाजपा सरकार और पुलिस पर पार्षदों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। पुलिस की कार्रवाई से जुड़े इन आरोपों को भाजपा सरकार की ओर से स्वीकार किए जाने की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है, इसलिए इन्हें कांग्रेस के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
निकाय चुनाव में क्या रहा था परिणाम?
राजस्थान के 309 शहरी निकायों के पार्षद चुनाव में भाजपा 148 निकायों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, जबकि कांग्रेस 104 निकायों में सबसे बड़ी पार्टी रही। कई अन्य निकायों में मुकाबला करीबी रहा और निर्दलीय प्रत्याशियों ने महत्वपूर्ण संख्या में सीटें हासिल कीं।
इसी कारण पार्षद चुनाव के नतीजे आने के बाद भी कई शहरों में बोर्ड की अंतिम तस्वीर अध्यक्ष पद के चुनाव के बाद ही स्पष्ट होगी।
22 सितंबर को अगला चरण
महापौर, सभापति और अध्यक्ष का चुनाव पूरा होने के बाद 22 सितंबर को उप महापौर और अन्य उपाध्यक्ष पदों की चुनाव प्रक्रिया होगी।
राजस्थान की शहरी राजनीति के लिहाज से अगले दो दिन महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। सबसे ज्यादा नजर उन निकायों पर रहेगी जहां भाजपा और कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से दूर हैं और निर्दलीय पार्षद निर्णायक स्थिति में हैं।
संबंधित खबरें

हर घर तिरंगा कार्यक्रम के तहत तिरंगा रैली का हुआ आयोजन
जिला प्रशासन के अधिकारियों कर्मचारियों सहित आमजन ने भी लिया भाग

प्रकोष्ठ प्रभारियों की बैठक आयोजित
पंचायत एवं निकाय चुनावों के संबंध में प्रकोष्ठ प्रभारियों की बैठक का आयोजन हुआ।

अजीम प्रेमजी छात्रवृत्ति योजना का शुभारंभ
जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अजीम प्रेमजी छात्रवृत्ति योजना का विमोचन एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम...

आगामी स्वाधीनता दिवस की तैयारियों के संबंध में जिला कलेक्टर ने की समीक्षा
150 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रमों की सेल्फी हर घर तिरंगा पोर्टल पर अपलोड करने एवं अन्य को भी प्रेरित करने की बात कही।
कमेंट